भीड भरे जगत बीच
मेरे हिस्से तन्हाई है
लुटा पिटा सा बैठा हूं
विश्व की रूसवाई है ।
अकेला मन से जूझता
पाता वहां भी वेचैनी
सुख दुख सब व्यापित हैं
अनुभव करता अनहोनी ।
अच्छे बुरे अनुभव पसरे
उथल पुथल चलता रहता
अनुभूति के मकडजाल में
जकडा मैं व्याकुल रहता ।
मानस की दुनिया विचित्र
रखती हर्ष विषाद के क्षण
एकाकी मंथन करता हूं
सुसमय के अनमोल क्षण।
आती याद दादी नानी
की सीख भरी कहानियां
छोटे छोटे बाल गीत
भाव भरे मनमानियां ।
चिंतन करने की छूट
होती है अकेलेपन में
बाहर से ज्यादा भीड
भरी पडी है अंतर में ।
ये तो यूं उधेड देता
बीते पल पल की बखिया
है अच्छा संयोग कि स्मृति
विस्मृत करती कुछ बतियां ।
अंदर बाहर में अंतर है
दिखता जो वो होता नहीं
मेरे भीतर के तूफान का
चलता तुमको पता नहीं ।
ईर्ष्या ,घृणा,द्वेष,अहं
करूणा,दया,ममता,प्यार
भरे पडें इसी ह्रदय में
तरह तरह के भाव अपार
विद्या
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