बेईमानी

अमृत कलश निकला जब मंथन से

पीने केलिये सब झगडने लगे

कटि पे कलश रख कर लचक लचक कर

परमेश्वर ने सुन्दर नृत्य किया ।

भरमा दिया सबको भंगिमाओं से

देव दानव मुग्ध हुए प्यारी अदाओं पे

बारी बारी मिलेगा समझाकर

उनके विवाद को झट सलटा दिया।

देव बना राहू पल में पहचाना

सर राहू धड केतु दो बना दिया

राहू का क्या दोष था गोविन्द

अमृत में उसका कुछ भी हक न था

मंथन में श्रम तो सबने किया था

फिर क्यो उसे ऐसा दंड मिला ।

आपने बराबरी का हक न देकर

बेईमानी मानव को सिखा दिया

विद्या

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