सपनों का क्या ही है करना
जगते सोते आते रहना
अंधेरी रात में जुगनू सा
चमक चमक कर राह दिखाना ।
सच तो कभी नहीं होते ये
आस जरूर जगा जाते हैं
ढाढस देते डूबते मन को
सुनहरे पंख लगा जाते हैं ।
है सरल नहीं सपने आना
हारे हुए मानव मानस में
कल्पना के टूटे डैने ले
उडते रहना असीम नभ में ।
टूटे सपने वाले लोग
हताश होते रहते जग में
सरलता से हार जाते वो
बाधाओं के चलते मग में।
नाव का पतवार है सपना
मन का आधार है सपना
छोटे छोटे सपनों का आना
गिरतों को उठाते जाना ।
देखने की हिम्मत का होना
आंधी में धैर्य न खोना
अंधेरे उलझन भरे पथ में
कुशलता से निकल कर आना ।
वे सपने ही सच होते हैं
डरते डरते देखे जायें
धने अंधेरे में कौंध कौंध
आकांक्षा दीप जगमगायें ।
विद्या
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