उसकी उठती गिरती लहरें
चिन्तन सी चलती रहतीं
लगातार आती जाती
सततता की कथा कहतीं।
अनेक नदियों को पाकर
अपने में विलीन करना
खारा खारा बना देना
एक रंग में रंग देना ।
ज्यों आत्मा ब्रह्म से मिल
परम धाम पा लेती है
त्यों नदियां सागर से मिल
मॉजिल प्राप्त करती हैं ।
नीली आभा प्रतिबिम्बित
पारदर्शी चमकीला दर्पण
प्राकृतिक सौंदर्य लिये ये
महाकाय बन जाता अर्णव ।
बता रहा सागर सबको
जग में सरोज बनकर रहना
सुख दुख आरोह अवरोह
हर पल निष्काम बन सहना ।
विद्या
————/////————/////—————/////————-/////
टिप्पणी करे