कोयल कूकी अमराई

तो कुहू कुहू का शोर उठा

फागुन आया सिहराते

इससे सबको पता चला ।

धरती को सारे कण कण

पर्यावरण का हर

हर्षित हुआ है रोम रोम

चमक उठा जैसे सोना।

किसने बता दिया उसको

ये ऋतु परिवर्तन की बात

वनस्पतियां सुलग उठी हैं

सब हो रहा अपने आप।

रात रानी ,रजनी गंधा ,

बेला ,गुलाब,कचनार

खिल खिल कर फैला रहे

चहुंदिश मीठी गंध अपार।

काल क्षण के संगसंग

बीज बढते जाते हैं

बीज से पौधा फूल फल

अनवरत उगते आते हैं ।

मिट्टी की शक्ति अनोखी

बीज डालो वही फल पाओ

यहां जीवन बढता जाये

स्वाद का आनंद उठाओ।

आया फागुन पोर पोर

सर सर सर सर हवा चली

प्रेमी जन लगे घूमने

अपने प्रियतम की गली ।

विद्या

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