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  • “ मैं तो मात्र छोटा बच्चा थाजय भारत के महान वंश काछोटा मोटा नन्हा हिस्सा थामैंने तो युद्ध नहीं रचा था ।पर वीर भीम का पोता मैंरण कौशल मां से सीखा था,हारे दल का ही पक्षलेनाउसने ये मूल मंत्र दिया था।साधा था अगनित शस्त्रों कोशंकर दुर्गा सबको खुश करके ,वर में तीन बाण पाया था…

  • अवकाशप्राप्त प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुरसेवानिवृत्ति तिथि: 31 जनवरी 2019 डॉ. विद्या रानी हिन्दी जगत की प्रतिष्ठित रचनाकार एवं विदुषी हैं। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, खंडकाव्य और यात्रा-संस्मरण जैसी विविध साहित्यिक विधाओं में सृजन किया है। हिन्दी और अंगिका — दोनों भाषाओं में अब तक उनकी कुल तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो…

  • “दुर्गा माता की आराधना” अट्ठारह भुजाओं में,शस्त्र पकडती हो,त्रिशूल ,शंख,चक्र,खड्ग ,ढाल भी रखती हो ,गदापाश,शूलपाश ,मणि ,कमल,धनुष बाण,घंटीअभय मुद्रा,वरमुद्रा से ,शुभाशीष देती हो ।शैलपुत्री ,ब्रह्मचारिणी,चंदघंटा,कुष्मांडा ,स्कन्दमाता,कात्यायनी ,काल रात्रि,महागौरी,सिद्धि दात्री ,इन नव रूपों में तुम ही विराजती हो।काली,तारा,छिन्नमस्ता ,श्री विद्या ,भुवनेश्वरी,धूमावती,मातंगी,बगुला मुखी,त्रिपुर भैरवी ,कमला संग में शोभती हैं,दसोंमहा विद्या भी आशीष दे रही हैं।नव दुर्गा,षोडस मातृका,दस…

  • “तांडव “तांडव कर रहे शंकर,कांपते कंकड कंकड ,सृष्टि की संरचना में ,भरते ऊर्जा निरंतर ।अग्नि हाथ में उठाये ,दानव को इंगित करते,जटाओं में चंद्र, सर्प ,गंगा की धार रखते।अर्धनारीश्वर रूप में ,पहन कर्ण फूल ,कुंडलहार ,बाजूबंद ,करधनी ,ले छाये पूरे भूमंडल।शोभता उत्तरीय ,जनेऊएक संग ही उनमें,एकी कृत हुए दोनों ,इस श्रेष्ठ नृत्य में ।दाहिने हाथ…

  • चार धाम यात्रालेखिका —डॉ विद्या रानीआचार्य एवं पूर्व अध्यक्षहिन्दी विभाग ति.मा.भा.वि.वि.भागलपुर। विभाग तिलका मांझी विश्व विद्यालय भागलपुर के साथ वंगलोर चली आई ।मेरी छोटी बहू ऋतिका दुबारा मां बनने वाली थी ।उसी उपलक्ष्य में यह निर्णय हुआथा कि हमलोग यहीं रहेंगे ।14 जनवरी 2022को ऋतिका एवं वैभव को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई एक पुत्री…