एक क्षत विक्षत अंगों वाला भिक्षुक
अपने नासिका विहीन मुख एवं
ऊंगली विहीन हाथ पांव लिये
दान के लिये कटोरा फैलाता है
अपने शरीर की रक्षा हेतु
तत्परता से पार कर जाता है सडकें
जिजीविषा की प्यास उसे भी भरमाती है
इतनी विकृतियों के बाद भी
जीवन का लुभावना रूप दिखाती है ।
विद्या
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