अम्बर आंगन में चमका
हीरे जैसा वो तारा
दिव्यता ले जगमगा रहा
चमचम चमचम हो न्यारा ।
टूटन उसकी लिखती है
क्षणभंगुर जीवन की
अनकही सच्ची कहानी
बीते बिताये पल क्षण की ।
जिंदगी नश्वर है यहां
इच्छाएं अविनाशी हैं
मिलते जुलते परिजन ये
कुछ ही समय के वासी हैं।
नश्वरता शाश्वत यहां
क्या दमकना औ बुझना
सत्य है दोनों समय में
स्थित प्रज्ञ बनतर रहना ।
जाते जाते दे जाना
सर्वस्व ही इस जग को
टूटता तारा देता है
कामनाएं प्रियजन को ।
रिले रेस सी ये दुनिया
चलती पीढी दर पीढी
धनधान्य परिपूर्ण हों
चढ लें उन्नति की सीढी ।
विद्या
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