1संकट में दुनिया चले ,टेढी मेढी चाल।
उथल पुथल से है भरा ,वर्तमान का काल।।
2 वतन रक्षा में हैं खडे ,भारत मां के लाल।
आतेदुश्मन के लिये ,बन जाते हैं काल॥
3 तन मनधन सब वार दो,मातृ भूमि पर आज ।
इससे बढकर है नहीं ,जीवन में कुछ काज॥
4नेता जनता सब करे ,राष्ट्र पर अभिमान ।
सैनिकों के शौर्य से ,जग में वढे सम्मान ॥
5 कितने वंश उजड गये ,दुष्टों ने दी मात।
मातृभूमि पर मर मिटे , जवानों की जमात।
6 जो न्यौछावर कर गये ,सबकुछ अपने आप।
उनकी निंदा मत करो ,लग जायेगा पाप॥
7 मानव के अधिकार की ,रक्षा करे ये देश
भेद भाव को भूल कर ,निर्मल हो परिवेश।
8 गंगा यमुना नर्मदा ,बहती हैं दिन रात।
बता देंगी भारत की ,सभी पुरानी बात ॥
9 है हस्ती पर बची हुई ,शक्ति ने दिया साथ
उमगते प्राण वारते ,लिये बंदूक हाथ ॥
विद्या
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