बनना पिता बहुत कढिन है
पल पल सतर्क रहना
थोडा प्यार थोडा गुस्सा
कछुए जैसा बन रहना।
देकर अनुभव की बातें
जीवन पथ को संवारना
कोमल मानस में जाकर
सन्मार्ग की राह दिखाना ।
दुनिया के थपेडे झेल
छत्रछाया बन कर रहना
बाहर के संकट से बचा
सबको सुरक्षित रखना ।
क्या करना है क्या नहीं
ये सही सही समझाना
अपनी इच्छा मार उनको
मनमाना सब दिलवाना।
सूरज ,चांद, गगन ,धरती
सबसे परिचय करवाना
श्रम कर आगे बढना है
यही मूल मंत्र बतलाना।
छोटी मोटी शरारतों
को इगनोर करना
संतानों को छोड छाड
मांको ही डांट लगाना ।
तेरे ही दुलार प्यार से
बिगडते जा रहे सारे
कभी नहीं बन पायेंगे
ह्रदय के टुकडे हमारे।
बढते बनते कुट्म्ब देख
उनका गर्वित प्रफुल्लित होना
पिछले सारे दर्द को
अनायास ही भूल जाना ।
कुम्हार सा अपने शिशु को
अंदर बाहर से संवारना
जग के थपेडों को सहने
की अनंत शक्ति प्रदान करना ।
विद्या
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