बंटवारा

बनना देश का

है बंटना खेत का

धरती मां को टुकडे में काट कर

हम खुश होते हैं अपनों को बांट कर

धरती हंसती है हमारा व्यापार देख

जीवन के ऊथल पुथल और कारोबार देख

हमारे बांटने से क्या बंटती है धरती ?

हमारे काटने से क्या कटती है धरती ?

कटते हैं हम अपने परिवार से

अपने बंधु और अपने विचार से

हमारा अट्टहास हमारा क्रन्दन है

हमारा जीवन एक बंधन है

कितना भी बांट लें हम धरती

कितना भी बनालें बोर्डर लाइन

लेकिन धरती अगर सचमुच खंडित हो गई

तो क्या बचेंगे हम

खंडन को रोकने के लिये ?

विद्या

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