भरमाना

मन हुलास और चंचल घडियां

ऐसे जायें बीते बीते

तुम हो पास और चंचल घडियां

क्षण क्षण जायें बीतें बीतें ।

ऐसे रहना पास तुम्हारे

मुझको खूब भाता है

जीवन में उमंग भर जाता

मन प्रसन्न हो जाता है ।

मिलन क्षण और दौडती घडियां

कैसे जायें बीते बीते

तुम हो पास और चंचल घडियां

क्षण क्षण जायें बीते बीते ।

मानो हो जीवन की संध्या

कुछ ही क्षण में जाना हो

बेला तुमसे मिलने की

कुछ पल का भरमाना हो ।

जीने की आस और उन्मन घडियां

कैसे जायें बीते बीते

तुम हो पास और चंचल घडियां

क्षण क्षण जायें बीते बीते ।

विद्या

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