“दुर्गा माता की आराधना”
अट्ठारह भुजाओं में,शस्त्र पकडती हो,
त्रिशूल ,शंख,चक्र,खड्ग ,ढाल भी रखती हो ,
गदापाश,शूलपाश ,मणि ,कमल,धनुष बाण,घंटी
अभय मुद्रा,वरमुद्रा से ,शुभाशीष देती हो ।
शैलपुत्री ,ब्रह्मचारिणी,चंदघंटा,
कुष्मांडा ,स्कन्दमाता,कात्यायनी ,
काल रात्रि,महागौरी,सिद्धि दात्री ,
इन नव रूपों में तुम ही विराजती हो।
काली,तारा,छिन्नमस्ता ,श्री विद्या ,
भुवनेश्वरी,धूमावती,मातंगी,बगुला मुखी,
त्रिपुर भैरवी ,कमला संग में शोभती हैं,
दसोंमहा विद्या भी आशीष दे रही हैं।
नव दुर्गा,षोडस मातृका,दस विद्याएं सभी,
दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा करतीं,
शुभ विजय देती हो मां ,पराक्रम सिद्धि देती
रक्षा करती धर्म का ,अधर्म का नाश करती ।
शक्ति,भक्ति ,मोक्ष देकर भक्तों को निर्भय करती ,
मर्यादा में रहने की शिक्षा भी देती हो,
लयात्मक सृष्टि को ,तुम ही चलाती मां,
ऐश्वर्य औ सिद्धि देकर ,सुखी बनाती हो।
पडी हूं चरणों में ,हे आदिशक्ति मां
बाधाओं को समाप्त कर ,हमें बचाओ मां
तेरी संतान नादान हैं ,गलती कर ही देते
क्षमा करके सबका कल्याण कर दो मां ।
विद्या 🙏🙏
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