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अवकाशप्राप्त प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर
सेवानिवृत्ति तिथि: 31 जनवरी 2019

डॉ. विद्या रानी हिन्दी जगत की प्रतिष्ठित रचनाकार एवं विदुषी हैं। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, खंडकाव्य और यात्रा-संस्मरण जैसी विविध साहित्यिक विधाओं में सृजन किया है। हिन्दी और अंगिका — दोनों भाषाओं में अब तक उनकी कुल तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

उनका शोध-प्रबंध “हिन्दी में अंग्रेज़ी से आगत शब्दों का अध्ययन” विशेष रूप से चर्चित रहा है। डॉ. रानी की अनेक कहानियाँ आकाशवाणी से प्रसारित हुई हैं तथा उनके शोधपरक आलेख, कविताएँ और कहानियाँ विश्वभारती, अनुसंधान, नवनीत, सहृदय, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।

उनका अंगिका उपन्यास “नटुआ दयाल” और अंगिका कहानी-संग्रह “कारो कबूतर उजरो पाँख” क्रमशः स्नातकोत्तर अंगिका तथा स्नातक अंगिका के पाठ्यक्रम में सम्मिलित हैं।

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