वार्ता की नई चाल में

जगत घूम रहा बेचैन

पूरी भीड में एकाकी

अपने आप में हैं लीन ।

सारे जग की न्यूज जान

पाठक खबरी लाल बने

नाते रिश्ते घर परिवार

छोड सभी बेहाल बने।

भूल रहे हैं हम सब यूं

परस्पर बतकही करना

छोटी छोटी बातों पर

कहकहे लगाना हंसना ।

ड्राइंग रूम गेस्ट के संग

बैठ बैठ कर टी पीना

अपने अपने मोबाइल

के चैट पर लगे रहना।

एकाकी पन छा गया है

सब लोगों के जीवन में

रखते हैं खबर लंदन की

नहीं पता अपने घर की ।

नीरस मन फालतु बातें

अनाप सनाप रील देख

डूबते सपनों की जद में

छोड छोड सामान्य रेख।

सोशल मीडिया खा रहा है

जन जन कासोशल जीवन

चैट में परम सुख पाते

अमीर गरीब सारे जन ।

विद्या

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पाठव

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