दुपट्टे की आप बीती

मैं एक टुकडा भले हूं पर बडा अहम हूं

लाज युवतियों का छिपाने का साधन हूं

सूती रेशमी सीफॉन जार्जेट मलमली हूं

फुलकारी जरदोजी मधुवनी कढाई से सजा हूं

पहले जहां बिना मेरे न निकलती थीं लडकियां

मेरे कोमल स्पर्श से लरजती थीं सखियां

हवा में उड जाता था उनका लालनीला दुपट्टा

जवां दिल की धडकनें बढा भी जाता था वो

आज मैं पडा हूं घर की आलमारी में घुस कर

सह्ज कर इस्तरी भी करके

मैं उडाता था नींद कितने मनचलों के

अब स्वयं उड गया हूं व्यवहार से मन से परिधान से

धीरे धीरे बाजार से भी उड जाऊंगा

इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाऊंगा ।

विद्या

———/////———-/////———-/////———-/////————////

··················

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करे