अधिकार का सुख

देता है आनंद

अधिकार छीनने की आशंका

मन को करती निरानन्द

मानव मन की इच्छा ने

सारा इतिहास रचा है

प्रवाह काल का उथल पुथल

को सहता ही चला है ।

जब सदवृत्तियां हुईं तिरोहित

कुवृत्तियों का राज हो

व्यथित मन जाने क्या सोचे

कब किस किस से काज हो ।

है जीवन संग्राम भयंकर

सभी इससे त्रस्त हैं

लेकिन दूसरों की टांगें खीचने में

ही सारे व्यस्त हैं

कठिन जिन्दगी कठिन जीवन

कठिन सारे क्रिया कलाप

कठिन से कठिनतर है

संयमित रखना अपने आप

सबके साथ मिलकर रहना

और कठिन है भाई

इसीलिये तो होती आई

दुनियां में लडाई ।

विद्या

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