महाकाल चक्र घूमता
संग संग सारा अम्बर
हीरक सा चमकीला बन
उसी जग मग चादर पर ।
मोल जीवन का यही है
आप सबकुछ छोड जाओ
शक्ति भर रोशनी देकर
ज्योति में कुछ जोड जा ओ ।
मैंने भी यही किया है
जगमग जगमगजगमग करता था
आई गिरने की बारी
निर्बाध होकर गिर गया था ।
मुझे गिरते देथ जन
मानते रहते मन्नतें
मैं भी चाहूं पूर्ण हों
उनकी मनो कामनाएं ।
विद्या
———-////————//////————-//////————-///////——-
टिप्पणी करे