महाकाल चक्र घूमता

संग संग सारा अम्बर

हीरक सा चमकीला बन

उसी जग मग चादर पर ।

मोल जीवन का यही है

आप सबकुछ छोड जाओ

शक्ति भर रोशनी देकर

ज्योति में कुछ जोड जा ओ ।

मैंने भी यही किया है

जगमग जगमगजगमग करता था

आई गिरने की बारी

निर्बाध होकर गिर गया था ।

मुझे गिरते देथ जन

मानते रहते मन्नतें

मैं भी चाहूं पूर्ण हों

उनकी मनो कामनाएं ।

विद्या

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