काल का मौन प्रवाह

प्रचंड, प्रशांत, निरन्तर सतत
प्रवाह काल का चलता है।
जन्म मरण की यात्रा में,
क्षण क्षण सहयोग करता है।।
विरवा वृक्ष बन जाना,
शिशु से युवा वृद्ध बनना,
कलियों का फूल बनना,
फिर फूलों का मुरझाना,
धीमे धीमे, एक गति से,
मौन रह कर कार्य करना,
सब समान रूप देखना,
सम दृष्टि की सीख देना।
महाशक्ति संपन्नता देखो
पल क्षण को भी न सकता।
अनंत प्रवाह लिए सृष्टि को,
एक गति से लेकर चलना।
इस शक्तिशाली का नियंता

कौन है कैसे पहचाने,
अद्भुत गति विचित्र लीला को,
किस तरह समझ समझाले।
(विद्या )

——//——-////——-////——//

··················

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करे