कल्पना साकार करतीं
मन की ऊंची उडानों को
निर्माण के मार्ग खोलती
जग के नव प्लानो के।
बिना कल्पना के जीवन में
नयापन कुछ न आ सकता
जग के यथार्थ से टकरा कर
नैराश्य में ही डूबा रहता ।
विचार कल्पना से जुड कर
नया नया कुछ करना चाहें
ऊंची ऊंची बातें सोच कर
नई नई चीजें गढना चाहें ।
कामना नभ कुसुम बनतीं
लेती हैं ऊंची उडान
पूरी अधूरी जो भी हों
चिंतन को देतीं पहचान ।
कल्पना पंखों पर हो सवार
मन तारों तक पहुंच जाता
मनोनुकूल दृश्य बना कर
स्वच्छन्द विचरण करता।
काले उजले बादल संग
कल्पना उडती जाती है
भरपूर सैर कर कर के
आनंद में डुबा देती है ।
मन की ये अद्भुत शक्ति है
मानव को विशिष्ट बनाती
नित नूतन आविष्कार की
निश्चित आधारशिला रखती ।
प्रस्तर युग से नेट युग तक
मनुष्य बढा इसी के सहारे
इसकी डोर पकड कर हम
तोड सकते हैं चांद तारे ।
विद्या
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