vidus

Eternal Learner

स्मृतियां २

काल के धुंध से झांकती

नित्य मानस में कौंधती

सतत मन को कुरेदती

अनेक अठखेलियां करती ।

जीवन के अंतिम पडाव पर

सामने वैकुंठ का दर्शन हो

मन विचरता भूत काल में

जैसे स्मृतियां जागृत हों ।

नहीं कोई सुनने वाला

हाशिये में पड गई हूं

भ्रमण करती भूत काल में

मन ही मन गुनते रहतीं हूं।

वो खारी मीठी बातें

अनेकश लुभाती रहतीं

मन के आंगन में घूमती

क्रीडा में रमते रहती ।

छोटी बडी शैतानियां

निडर हो शेयर करती

छडी,जूते,थप्पड खाना

वेशर्म होकर बताती ।

बचपन वो बीत गया है

मारने वाले स्वर्ग गये

मैं उन आनंद में डूबी

लेती हूं नित आनंद नये।

स्मृतियां बहलाती बहतीं

डुबाती नचाती भंवर में

आलोडन विलोडन खूब

मचाती मन के अर्णव में ।

पहले प्यार की अनुभूति

प्रथम वियोग का नैराश्य

प्रथम मिलन का आनंद

सभी घूमते आसपास ।

प्रथम शिशु को पाने का

सुख तो बडा अनोखा था

भीषण पीडा फिर ऊं ऊं

जीवन पाने जैसा था ।

पैसे की कमी खर्च ज्यादा

हाथ हमेशा ही तंग रहते

पर उन्हें सुलझा सुलझा

हम जीवन नैया खेते ।

सुख दुख मान अपमान के

दिन भी एक रंग बीते

हंसना रोना जगना सोना

संग संग ही चलते रहते ।

आज बैंक में हैं पैसे

कोठी में भी अनाज भरा

खाने वाले तो गायब

घोंसला तो खाली हुआ ।

आज के खालीपन को

पुरानी यादें ही भरतीं

ये स्मृतियां आ आ कर

तन मन को पुलकित करतीं ।

विद्या

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