दिन चर्या

मुंह अंधेरे उठकर

सारे उपले थाप आई

नित्यकार्य के बाद

चुल्हा सुलगाया फिर

मोटा मोटी रोटियां थाप कर

सुगनी गाय चराने गई

दो रोटियां बांध कर ।

आठ बजे तक

खटिया तोडने के बाद

उठा,मां को झाडा

चाय के लिये चिल्लाया

दैनिक कर्म के बाद अर्जुनवा

मजलिस जमाने पान की

गायों को लेकर /सावी पानी लगाया

दूकान पर गया ।

संध्या काल में सुगनी लौटी

चुल्हा सुलगाया

भात दाल बनाया

मां ने सबको खिलाया

सुगनी भी खाने बैठी

फिर सो गई।

अर्जुनवा घर लौटा

शहर जाने के लिये मां से

पैसे मांगे ,चीख पुकार मचाई

मां बाप की दरिद्रता पर ताने कसे

सुगनी की अकर्मण्यता पर भाषण दिये

फिर भोजन कर सो गया

विद्या

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