Write about a time when you didn’t take action but wish you had. What would you do differently?

एक बार मैं भागलपुर से पटना ट्रेन के ए सी थ्री चेयर कार में अकेली जा रही थी ।जून महीना गर्मी अपने चरम पर थी ।किऊल स्टेशन आते आते एसी खराब हो गया और डिब्बे में बैठे दवंग टाइप लडकों नें डिब्बे की खिडकी तोडना शुरू किया ।हवा नहीं आने के कारण सब लोग गरमी में पसीने पसीने हो रहे थे ।सबको अच्छा ही लग रहा था कि हवा तो आयेगी भले खिडकी टूट जाये ।खिडकी टूट भी गई हवा आने लगी ।लोगों ने राहत की सांस ली ।पर एक गडबडी ये हुई कि एसी डिब्बा जेनरल जैसा हो गया सारे वेचने वाले अपना अपना सामान लेकर आने जाने लगे उनके साथ पॉकेटमारों का झुंड भी विचरण करने लगा ।मैं असहज हो रही थी ।इतने में एक करीब बीस साल का लडका मेरे पीछे आकर खडा हुआ।भीड बढ रही थी इसमें ये साधारण बात थी ।थोडी देर बाद मुझे अपने गले पर चिमटे जैसी चीज का स्पर्श महसूस हुआ जबतक मैं पीछे मुड कर देखती मेरा सोने का चेन कट चुका था वो लडका गायब हो गया ।जब मैंने सहयात्रियों को बताया तो उन्होंने ढेर सलाह दी कमप्लेन करिये स्टेशन मास्टर को फोन करिये पर मैं डर से कुछ नहीं कर पाई थी ।आज सोचती हूं कि ऐसी स्थिति आने पर मुझे अगले स्टेशन पर उतर कर शिकायत करना चाहिये था उस चोर को पकडने की कोशिश करना था ।

पर आज भी मैं कुछ डिफरेन्ट नहीं कर पाऊंगी क्योंकि पैर से लाचार हूं कहां दौडूंगी किससे कहूंगी उसी तरह संतोष कर लूंगी जो गया वो अब मेरा नहीं था और क्या ।

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