फासला

जीवन का चरम लक्ष्य जब

अनंत यात्रा रहा है

और जीवन एवं मृत्यु के बीच

एक पल का फासला है

तो क्यों हम ढोंग ,फरेब ,

छल ,प्रपंच के जाल में

स्वयं को दिन रात उलझा कर

सपने बुनते हैं

पाने को धन ,पदऔर जन

जबकि ये सभी नश्वर हैं

होना है इन्हें भी समाप्त एक दिन

रह जायेंगे ये सब यहीं

और हम चल पडेंगे

इस असीम यात्रा में

जिसकी ओर सबकी नियति है

विद्या

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