vidus

Eternal Learner

दिशा

रात्रि भर निपट अंधेरे से गुजरने के बाद

दिशाओं के गाल ,होनेलगे लाल

प्रियतम के आगमन को गुन

दिवस भर संग साथ रहा

हास और परिहास रहा

उछले कूदे मौज मनाए

आते ही संध्या

दिशाएं हो गईं पलाश

विरह की संभावना से त्रस्त

धीरे धीरे

पुनःअंधकार में डूब गई ।

विद्या

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