Describe a risk you took that you do not regret.

1998 के मई महीने में मेरे पति श्री अशोक कुमार सिन्हा का स्कूटर एक मोटर साईकिल से टकरा गया और वे कचहरी चौक से थोडा आगे राजहंस होटल के मार्ग पर गिर गये ।उनका सर फूट गया और खून बहुत तेजी से बहने लगा ।चूंकि एल आई सी का पहला ब्रांच नजदीक था खबर मिलने पर लोग आये और उन्हें वहीं किसी ऑफिस के वरामदे पर सुलाया गया ।खबर मिलने पर मैं भी पहुंची और प्राइवेट अस्पताल में एडमिट नहीं होने के कारण माया गंज अस्पताल के इमरजेन्सी वार्ड में ले गई।वहां घाव की सफाई हुई दवा दी गई इस हिदायत के साथ कि रात भर सोने नहीं देना है क्योंकि सिर पर चोट है ।सम्बन्धी लोग आ गये थे डॉ लोग भी हर आधे घंटे मे आकर चेक करते कि होश में है या नहीं ।रात कटी दूसरे दिन एल आई सी के लोग मिलने आये और पटना या कलकत्ता ले जाने की सलाह देनेलगे।मैंने कहा कि यहां जो भी इलाज हो रहा है वो आठ घंटे के लिये बंद हो जायेगा तो स्थिति और ही बिगडेगी इसी लिये यहीं भागलपुर को अस्पताल में इलाज करवायेंगे कहीं नहीं जायेंगे।लोगों की दृष्टि में ये बहुत बडा रिस्क था कुछ भी हो सकता था पर मेरा दृढ निश्चय देख कर लोग शांत हो गये ।इस रिस्क के लिये मुझे जरा भी खेद नहीं है क्योंकि वहीं के इलाज से मेरे पति ठीक हो गये बाद में पटना जाकर उन्हें डॉ आर चन्द्रा से भी दिखाया गया ।आज वे स्वस्थ प्रसन्न हैं।

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