What was the best compliment you’ve received?
मुझे सर्वोत्तम प्रशंसा मेरे बडे पुत्र अभिनव (डुडु भगवानपुरी )की कविता की इन पंक्तियों में मिली है ———
“घर में हमें पढाती बैठ कर
चूल्हे की आंच भी जलती थी
कॉलेज में ज्ञान की गंगा बहती
पर आंखों में चिन्ता पलती थी ।
वह सचमुच घर की प्रोफेसर थी
कर्तव्यों की जीवित मिशाल
कहने वाले दुनिया में बहुत थे
पर करने वाली केवल मां ।
शायद आशा ही जीवन है
शायद ममता ही भगवान
विपत्ति चाहे जितनी घनी हों
आशा बनती नई उडान।
मां की आशा दीप बनकर
हर तूफान में जलती है
हम गिरते हैं फिर उठते हैं
क्योंकि मां अब भी सम्भालती है।“
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