महाशक्तिशाली है काल
उससे परे तो कुछ नहीं
बिडम्बना तो देखो उसकी
कुछ भी बोल पाता नहीं।
किसी की कुछ नहीं सुनना
शनैःशनैःनिरन्तर चलता
निर्बाध रहना ही गति है
निर्वाक रहना ही मति है।
सोचो अगर बोलता तो
क्या नहीं कर सकता वो
मन का पोल खोल देता
सारे परदे तोड देता ।
बोलता अंतरमन की बातें
क्यों छिपा कर रखते हो
निर्भीक होकर क्यों न रहते
किससे इतना डरते हो ।
काल दर्पण है अंतरमन का
कुछ भी उससे छुपा नहीं
गहरे मौन में छुपा रखता
ये सारी बातें अनकही।
बताता कहां चुप्पी भली थी
कहां ना बोल गलती की थी
जीवन के उतार चढाव में
जो छूटा नहीं छूटनी थी।
काल का कहर जब आता
त्राहि त्राहि सा मच जाता
सभी कोसते लगते उसे
व्यंग करते रहते कैसे ।
वहीं जब सुखद दिन लाता
सुख ,शान्ति औ समृद्धि देता
सब अपने पर इतराते
काल को भूल ही जाते।
बोलता काल तो पूछता
क्यों ऐसा विपरीत भाव
अच्छे दिन को तुम बनाते
बुरे दिन पर मेरा प्रभाव।
कितने लोगों से बोलपाता
किन किन शिकवों का निदान
करोडों के अरबों प्रश्नों
का उत्तर दे देता पहचान ।
काल को गूंगा बनाया
ना वाचन ना श्रवण दिया
जग के हित ये काम किया
मौन की शक्ति दिखा दिया ।
मैं तेरा दुश्मन नहीं हूं
तेरे वजूद का साक्षी हूं
समानता की दृष्टि रखता
सत्चरित्र का पारखी हूं
विद्या
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