परिवर्तन शील जगत में मूल्य
बनते संवरते रहते हैं
युग युग से अनेक रूप में
सदा व्यवहार में चलते हैं ।
बदलते जा रहे हैं ये
विकसित समाज हो रहा
कल तक जो जकडे थे हमें
आज पिघलता जा रहा।
नैतिक मूल्य संवारते
चरित्र संस्कार मानव के
अनुशासित बनता जीवन
उन मूल्यों को अपना के ।
संयुक्त परिवार का शासन
सत्चरित्रता ,ईमानदारी
सहयोग ,सदभाव,करूणा
दुनिया भर की समझदारी।
बदले मूल्य नीति बदली
एकल परिवार हावी हुआ
टू चाइल्ड से वन चाइल्ड
फिर नो चाइल्ड लागू हुआ।
विवाह संस्था नष्ट हो रही
नये नये रूल्स आये हैं
विश लिविंग ,सिचुएशन लिविंग
ओपेन रिलेशनशिप छाये हैं।
मानवता के शाश्वत मूल्य
हर युग में रहेंगे वैसे
सत्य,अहिंसा,त्याग,सहयोग
भाव हैं अमृत जैसे।
बदलते मूल्य से होता विकास
कट्टरपंथी से छुटकारा
पर इसमें जो विकृति आये
जीवन को बनाती कारा।
मानव मूल्यों को बचाना
हम सब की जिम्मेदारी है
जीवन को सुरक्षित रखना
बहुत बडी होशियारी है।
नष्ट न हो ये सभ्यता
हरे भरे सब फूले फलें
प्रकृति माता हो प्रसन्न
उसकी गोद में हम झूलें
विद्या
——-////——////——-////——-/////——-
टिप्पणी करे