सूखी टहनियों जैसे
हाथ-पांव
पिचके गाल
लटकी झुर्रियां
कमान सी कमर
पके केश ,मूंछ,भौंहें
काल की निर्दयता का
प्रतीक जिसने उसे
झकझोर- झकझोर कर
जर्जर बना दिया है
मृत्यु को अंगूठा दिखाते
गहन संसार सागर में
जीते चला जा रहा है।
विद्या
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