सपने तो सपने हैं ,आते जाते रहते हैं
नूतन जीवन के सपने समय से पूर्ण होते हैं ।
एक दिव्यात्मा के आगमन का संकेत मिलते ही
मां की कल्पना ताने बाने बुनने लगती हैं
ममता के धागों से आकृति बुनी जाती है
हरेक स्पंदन से सिहरन बढती जाती है
हर सांस स्थिरता ,हर कदम दृढता ,
हर तंत्रिका होती सजग आ रहा नव जीवन
प्रकृति मां बारीकी से काया का जाल बुनती है
नव काया ढालने केलिये अनेक जतन करती है।
विद्या
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