ये शहर फेक मुस्कानों का
पुतले जैसे इंसानों का
सभ्यता का लबादा ओढे
प्रकांड शिक्षित विद्वानों का।
यहां अनजान आदमी भी
नजरें मिलते मुस्काता है
मुस्कान भी ऐसी मानों
ए आई से निर्मित हो
अगर आप नहीं मुस्काये
तो बिना एटिकेट के प्राणी हैं
असभ्य ,मूर्ख ,भुच्च ,देहाती
संग संग परम अज्ञानी हैं ।
भूल जाना है यहां हमको
अपने शहर का उन्मुक्त हास
ताली पीट पीट कर हंसना
मुलाकात को बनाना खास ।
फेक मुस्कान वाले शहर में
घडी की सुई पर चलते लोग
टाइम लेकर ही मिलते हैं
परिचित और अपरिचित लोग।
ऊंची सभ्यता का तकाजा
कृत्रिम बुद्धि का चमत्कार
मुख पर यूं मुस्कान रख कर
अंदर आंधी लिये अपार।
यहां संवेदनाएं हो रहीं मूर्छित
होती जा रहीं सब बेकार
प्यार, दया ,करूणा ,स्नेह
बिना मानव हो रहा बेजार ।
कोमल भावों का व्यवहार
बीते युग का फसाना है
प्राकृतिक बुद्धि को छोड
बनावटी बुद्धि को अपनाना है।
हम मानव मानव न रहेंगे
कृत्रिम होगा सारा व्यापार
मन बुद्धि कुंद होकर रहेगा
सभ्यता से जायेंगे हार ।
फेक जीवन फेक बुद्धि औ
फेक सारे क्रिया कलाप
सरल सहज जीवन जीना
होता जा रहा है अभिशाप ।
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