vidus

Eternal Learner

“हम”

हम बन गए बम

हम बन गये पटाके

देश में अंधकार का

बोलबाला हो गया

सूरज डरते डरते

निकलता है

छिप जाता है जल्दी ही

पहाडों की ओट में

उससे हत्या का नंगा -नृत्य

देखा नहीं जाता ।

रात्रि अंधेरे में समेटती है

हत्यारों के कृत्य

सिसकते सिसकते

रात भर

रो रो कर

धरती को आंसुओं

से पाट देती है।

विद्या

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