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Eternal Learner

“सोना”

सोना सोना सोना करती

सोने पर दुनिया है मरती

लडती कटती काटती है

सबसे बढ कर मानती है।

जगमग जगमग करता है

मलिन कभी भी नहीं होता

सुख संपदा का प्रतीक है ये

सबको ऐश्वर्य वान बनाता ।

जगत अर्थ की नींव यही है

इसका शासन ही चलता है

इसके पाने खोने को लेकर

जन जन का सौभाग्य जुडा है।

सब हैं पागल इसके पीछे

अहं बढाता मदहोश करता

इसकी थाती रख मानव

जग को है नीचा दिखाता ।

अपनी ऊंगली पर है नचाता

कपट छल बेईमानी सिखाता

सत्य अहिंसा को छोड कर

झूठ हिंसा का मार्ग दिखाता।

खरा सोना बन कर दिखलाना

आग में तपकर निखरते जाना

ये भी इसके ही सदगुण हैं

सफलता इसकी कसौटी परम है

विद्या

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टिप्पणियाँ

2 responses to ““सोना””

  1.  अवतार
    अनाम

    बहुत सुन्दर

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  2. stellarda09305b0c अवतार
    stellarda09305b0c

    बढ़िया

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