अशोक एक महान सम्राट
व्यक्तित्व था उनका विराट
पूरे भारत में फैला था
उनका विशाल साम्राज्य।
मां धरमा पिता बिन्दुसार
दोनों का संरक्षण मिला
अपनी लगन परिश्रम के बल
महावीर शासक बना।
हिंसा और अहिंसा दोनों
की पराकाष्ठा थी उसमें
निन्यानवें भाईयों को मार
डाला था अगम कुएं में ।
अनेक युद्ध लडे जीवन में
पराजित कभी नहीं हुए
कलिंग युद्ध का संहार देख
कर अन्तर्तम तक विचलित हुए।
कलिंग युद्ध के बाद ऐसा
बदल गया था उनका चिंतन
योद्धा धर्म त्याग कर चले
अपनाने को बौद्ध धरम ।
तदुपरान्त तो विपुलता से
प्रचार और प्रसार किया
विश्व के अनेक देशों तक
इस धर्म को पहुंचा दिया ।
युद्ध से बुद्ध तक की यात्रा
के अतुलनीय मशाल बने
किया इतना जन कल्याण
चंडाशोक से प्रियदर्शी बने।
जन संपर्क को ऐसे साधा
देवानांप्रिय कहलाये
जन सेवा का व्रत लेकर
मानवता महान बतलाये।
साक्षी है अशोक स्तंभ
और अनेक शिला लेख
आज भी दिशा निर्देश करते
बताते सुशासन की रेख।
अशोक स्तंभ राष्ट्र चिहन् बना
विजय वीरता का प्रतीक
बता रहा उनकी कीर्ति को
यश की कहानी सटीक ।
बदलती जैसे ही बुद्धि
तमगुण सदगुण बन जाता
विनाश कारी मार्ग त्याग
दानव मानव बन जाता ।
विद्या
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