vidus

Eternal Learner

“एलिगोरिद्म का युग”

अंकों की भाषा है ये तो

यंत्रों की चिंतन विधि है

नव नव आविष्कारों को

दे देता तीव्र गति है।

मोबाइल ,टीवी,टेलिफोन

कम्प्युटर ,इंस्ट्रा,डेश टॉप

फेश बुक,यूट्यूब ,वाट्स एप

सबका बना विधाता है।

कठिन समस्या को सरलता से

त्वरित सुलझा पाता है

उलझन भरे विचारों को भी

नये नये अर्थ देताहै।

कभी लचीला कभी कठोर बन

अनेक नियमों को जोडता है

यंत्रों की धडकन में बस कर

प्रगति का संदेश देता है।

कृत्रिमता इसकी प्रथम शर्त है

भावना का बुरा हाल है

ये मस्तिष्क से चलता है

हृदय की जगह नहीं है।

एलिगोरिद्म के युग में

संवेदना शुष्क हुई है

मशीन बना है आदमी

दिमाग को आराम नहीं है।

दूर नहीं है वो दिन भी

मानव चिंतन बंद करेगा

कृत्रिम बुद्धि से चलेगा

जो कहेगा वही करेगा ।

विद्या

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