सत्ता के लोभी लोग सभी
समान चरित्र के होते हैं
मानवता का धर्म त्याग
दानव से हो जाते हैं ।
अधिकार की लालसा बढती
हिंसात्मक कार्य करते हैं
अहिंसा ,करूणा ,दया ,प्रेम
बिलकुल भूल ही जाते हैं।
अपने को विशिष्ट समझते
मानो वो भगवान ही हों
दम्भ ,अहंकार,अभिमान सभी
उनकी सच्ची पहचान हो ।
भयभीत करता रहता है
सारी अधीन जनता को
दहशत में रखना चाहता
अपना कर नृशंसता को ।
भय और महत्वाकांक्षा
जब मन में भर जाती है
नेक दिल वालों को भी
क्रूर कर्म में डुबाती है।
कोई एक कमजोरी ही
बुरे मार्ग में डालता है
फिसलता ऐसे मार्ग पर
संभल ही नहीं पाता है।
सन्मार्ग से कुमार्ग पर ले
जाना तो अति सुगम है
हिंसा ,घृणा ,कठोरता सब
की शक्ति ही अगम है।
क्रूर काल की गति बनाती
भयंकर तानाशाहों को
ईदी अमीन,यहिया खां
जैसे नृशंस शहंशाहों को।
नादिर शाह ,औरंगजेब
हिटलर ,चंगेज,मुसोलिनी
कैसे कैसे दानव आये
की मानवता से दुश्मनी ।
इन लोगों का काल रहा
इतिहास में अंधकार काल
काले अक्षरों में लिखा गया
ऐसे सत्तालोलुपों का हाल ।
विद्या
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