आदमी बडा कि आमदनी
इज्जत किसकी बडी होती
आय आदमी से अधिक
सर्वत्र बडप्पन कीर्ति पाती।
इज्जत ,सम्मान,मान,प्रतिष्ठा
सभी कमाई के हिस्से आते
जिसके पास जितने पैसे
वो उतना ही महत्व पाते।
जैसे बैटरी समाप्त होते ही
फोन नाकाम हो जाता
वैसे रिक्त हस्त आदमी
जीवन में पस्त हो जाता।
पैसा तो हाथ का मैल है
यही तो सबकुछ नहीं है
कहने वाले कहते पर
ये बहुत कुछ है सही है।
अरबपति से कंगाल बनते
दया दिखाया जाता है
अर्श से फर्श पर जाने को
फिल्मवत सुनाया जाता है।
राजा से रंक बनते ही
दृष्टि बदल जाती है
पलक पांवडे बिछाती आंखें
नजरें चुराने लग जाती हैं।
एक मिनट में सम्मान जाता
निर्धन होते प्राणी का
अभिमान का गुंबद ढहता
प्रचंड घमंडी अभिमानी का।
समाज में इज्जत जाती
इधर घर के परिजन भी
हेय दृष्टि से देखने लगते
अपनी पत्नी औ बच्चे भी।
दाता से लेता बनते ही
दुनिया बदल जाती है
देने वाले हाथ की मुद्रा
पल में पलट जाती है।
आमदनी की इज्जत होती
आदमी की तो कभी नहीं
जिस भी मार्ग से आय बढती
प्रतिष्ठा बढती जाती वहीं।
विद्या
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