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Eternal Learner

“प्रकृति की सक्रियता ”

जुलाई 9

निष्क्रिय नहीं बैठती प्रकृति

प्रतिक्षण सक्रिय रहती है 

निमेष,क्षण,पल,दंड ,हर खंड

चलायमान ही रहती है।

बीज पडे या न पडे धरा

सुग वुग सुग वुग करती है 

खाली ,पथरीली जगह पर भी 

घास फूस उगा लेती है।

मानव मस्तिष्क सक्रिय रहता 

चिंतन तरंगें आती रहतीं

चतुर्विध चतुर्दिश की बातें 

सतत शोर करती रहतीं ।

चिंतन मनन सकारात्मक हो 

तो सबकुछ सही रहता है 

नकारात्मक भाव पनपें तो 

अनर्गल बातें उग आतीं।

जन कल्याण मानवता हो 

हमारी सोच का बहाव 

जन हित में काम कर सकें 

डालते रहें सुखद प्रभाव।

आती जब नकारात्मकता 

तामसिक भाव पनप जाता 

ईर्ष्या ,घृणा ,वीभत्स,कटु 

सब दिमाग में पसर जाता ।

इससे बचकर रहें सदा 

सात्विकता पर ध्यान धरें

इस सक्रियता का उपयोग 

जगत कल्याण में ही करें।

विद्या

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