चतुराई करते करते ही
जीवन बीतता जा रहा
क्या लाभ क्या हानि पाया
समझ में नहीं आ रहा।
क्या करें जो लाभ पायें
समाज में चतुर कहलायें
धूल झोंकना पडे चाहे
पीठ पीछे छूरा भोंकें ।
मुंह में राम बगल में छूरी
लेकर जो भी चलते हैं
चतुराई में सबसे आगे
वे ही तो निकलते हैं।
चतुराई अपनायें हम
अवश्य लें विवेक को संग
बेईमानी धोखा घडी को
कभी न धारण करें अंग।
सच्चे चतुर जो होते हैं
सच्ची राह पकडते हैं
गलत राह को तो वो
दूर से ही नमन करते हैं।
दोमुंहा अर्थ वाला शब्द है
चतुर ,चतुराई,चतुरता
सकारात्मक नकारात्मक
दोनों अर्थ में खूब चलता ।
सकारात्मक चतुरता में
बुद्धि और निपुणता रहती
नकारात्मक चतुरता में
छल धोखा बेईमानी रहती।
गागर में सागर भरते
सूझ बूझ से लेते काम
वे भी बडे चतुर कहलाते
जग में होता पूरा नाम।
जो आंखों में धूल झोंकते
कान कतरना जानते हैं
पीठ में छूरा भोंकने वाले भी
चतुर बेईमान कहलाते हैं।
कितना भी माथा फोडें
मार्ग नहीं मिल पाता है
चतुर चतुराई कर करके
अपना काम निकालता है ।
विद्या
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