खेती पाथी घर परिवार
चलाते अस्सी पार हुए
सबको अपनी राह लगा
गांव में बाबा जीते रहे।
पल में प्रलय होता है
ये तो वो भी जानते हैं
पर बरसों की योजना
बनाने से नहीं मानते हैं।
लगता उन्हें रहूंगा जीवित
मैं तो अनंतकाल तक
समस्त इन्द्रियां सजग रहेंगी
जीवन के भविष्यकाल तक।
आज भी जब तेज आवाज में
बनिहार को पुकारते हैं
कहीं भी रहे दौडते दौडते
वे आंगन में पधारते हैं।
हर बार बरसात के बाद
छप्पर ठीक करवाते हैं
भंसा घर की कच्ची भूमि को
पक्का करवाने की ठानते हैं।
हर दिन कुछ न कुछ
करवाना ही रहता उनको
ध्यान देना सब पर
कुछ नहीं छोडना उनको।
वेर, बेल ,अमरूद,पपीता
पर पडे नहीं किसी की नजर
सुथनी का बेटा बडा चोर है
ले जाता है चोरी कर।
सब फल को बचा रखना है
बेच कर पैसे लेना है
सारी मेरी सम्पति है
किसी की नजर न पडने देना है।
सब फलों की रखवारी में
जोगवारा बाबा रखते हैं
बोरी बोरी फल बेचकर
पैसे गिनते रहते हैं।
बच्चे उधर से पत्थर मारते
इधर ये गालियां देते हैं
उनके सात पुश्तों का
उद्धार ही कर देते हैं।
कहते लोग छोडिये बाबा
अब आप पके आम हुए
कब टपकेंगे पता न चलेगा
संकट क्यों लेते नित नये।
बोलते बाबा सुनो टुनवा
पक्के पक्के की सही है बात
कच्चा आम भी टपक जाता है
जब भी काल लगाता घात।
जीते जी नहीं छोडेंगे
दीन दुनिया का ये तंत
अपनी चीजों पर ध्यान देंगे
चाहे कोई कितना कसे तंज ।
विद्या
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