काल है अनंत निष्कलुष
अगाध गति से चलता है
ब्रह्मांड की गतिविधि को
एक ही लय में रखता है ।
मुट्ठी से फिसलते बालू से
समय निकलता जाता है
क्षण मात्र बचा नहीं सकते
मानव निरीह बन जाता है।
पैसा हाथ का मैल है
है ये विनिमय का साधन
गया पैसा कमा लिया जाता
बीता समय ला पाता कौन।
किसी काम को करने को
चौबीस घंटे ही मिलते हैं
इसी में कोई बनते खरब पति
कोई खाक पति बनते हैं ।
दुनिया कठपुतली है काल का
मनमाना नचाता रहता
एक इंच भी टस से मस
किसी को करने नहीं देता।
किसी भी कोण से देखें
काल बली है काल महान
परवा नहीं करने वालों का
मिटा देता है नामनिशान ।
समय के आगे होते बाल
पकडना हो तो आगे से पकडो
गुजर जाने के बाद तो
कभी न हाथ आता किसी को ।
समय का महत्व समझने वाले
जीवन में आगे बढ जाते ।
फूंक फूंक कर पांव रखते
सफलता के झंडे गाडते ।
समय का मोल नहीं समझता
वो मानव पछताता है
उसके बीत जाने के बाद
हाथ कुछ नहीं आता है ।
वैसे भी जब समय आता
सबकुछ सही होने लगता
सारे उलटे पुलटे काम
पल भर में बनने लगता ।
विद्या
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