धूर्तों की जमात खडी है
दुनिया के बाजार में
माहौल नष्ट हो रहा
मानवता के संसार में।
दुर्भावों में प्रमुख धोखा
चालबाजी ,बेईमानी
छल ,कपट ,स्वार्थी पन
धूर्तता की पक्की निशानी।
उल्टी खोपडी से चलते
कभी सदभाव नहीं आता
आंखों में धूल झोंकते
छल करने से है नाता ।
किसी मार्ग से हमें कुछ
ही सही लाभ मिल जाये
कोई मतलब नहीं कि
दूसरे क्या करें कहां जायें।
चोरी चोरी आसानी से
सबकी जड काट देंगे
उसके सामने अपने को
निर्दोष सिद्ध भी कर लेंगे।
तिनका अपनी चोरी का
दाढी में छुपा कर रखेंगे
अपने सच्चे स्वरूप को
प्रगट नहीं होने देंगे ।
थोडा विवेक को रोकेंगे
सच्चाई से मुंह फेरेंगे
चुप चुप काम करके
अनेक लाभ लेते रहेंगे।
कौन जानता स्वर्ग नरक
पाप पुण्य ईमान की बात
जीते जी करते रहेंगे
सिर्फ अपने लाभ की बात।
काम करें या मजदूरी
सबमें धूर्तता कर सकते
मिलावट ,डंडी मारना
काम चोरी भी कर सकते।
इससे ठग सकतें हम
सीधे सच्चे लोगों को
लेकर उससे ऐश करेंगे
पता लग पायेगा कैसे।
बिना पढाये पैसे ले लें
खुद को चतुर सयाना समझे
आगे पीछे कुछ नहीं देखें
कर्म फल को नहीं परखें ।
पर इससे सम्मान न मिलता
क्षणिक सुख ही मिलता
रावण,दुर्योधन,शकुनि सा
दुर्गति में डूबना ही मिलता ।
विद्या
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