घुमावदार सडकों से होकर
पहाडों की परिक्रमा कर
पहुंचे मसूरी के रिसॉट में
निर्धूम वायु से फ्रेश होकर।
पहाडों की रानी मसूरी
सुदर्शन वादियों से भरीं
असंख्य कोटि के वृक्ष लताएं
अराजक ढंग से थीं उगीं।
चतुर्दिक हरियाली पसरी थी
परस्पर लिपट कर गड्ड मड्ड
केयर लेस व्युटि से लगते थे
उलझे वनस्पतियों के हट्ट।
अराजकता में सुन्दरता
प्रकृति के हाथों ही संभव था
ऐसे ही रहेंगे बिखरे
पंक्ति में सजाना असंभव था ।
दूर पहाडों पर दीख रहे
ये आकर्षक काठ के घर
जिसमें रहते कर्मठ सरल
मजबूत शान्त नारी नर ।
मैदानों से एकदम भिन्न
उपस्थिति थी यहां नेचर की
मानों बढ चढ बोल रहें
गुप्त कथा उस क्रियेचर की ।
लाल डिब्बा गन हिल ,कैम्टी
फाल्स, कैमल्स बैक रोड
सबका अपना सौंदर्य था
उनमें नहीं था प्रतिरोध ।
बुरांश फूलों का ठंडा पेय
खट्टा ,मीठा ,गुलाबी रंग
ताजगी औ ठंडक से भरा
स्फूर्ति से परिपूर्ण अंग अंग ।
अनायास वर्षा का आना
अन चाहे अतिथि की तरह
छींटों से घर भर देना
अनौपचारिक मित्र की तरह।
टिप टाप बजने लगे थे
घर के छत पर लगे टिन
कभी तेज कभी मंद गति
ध्वनि करते रहे भिन्न भिन्न ।
कुछ ही देर शोर के बाद
वो मौसम साफ हो गया
बादलों का आना जाना
देख मन रोमांचित हुआ।
रात में चांद चमक रहा
जगर मगर तारों से घिर
पारदर्शी अंतरिक्ष दीखता
चटक चमकीला फिर फिर ।
देखा न था इत्ते करीब से
ऐश्वर्य शाली प्रकृति को
अपूर्व सौंदर्य से भरा भरा
इन सतरंगी वादियों को ।
विद्या
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