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Eternal Learner

“नौकरी पेशा मां का दर्द”

नौकरी करना जरूरी है

ये जीवन की मजबूरी है

परन्तु अपना केरियर है

बराबरी कमजोरी है।

नारी किसी से कम नहीं

अपार मेधा है भ्रम नहीं

पैसा कमा कर लायेंगे

अपना स्टेटस बढायेंगे ।

एक तरफ केरियर मेरा

दूसरी तरफ ये परिवार

पति संग प्रणय का दायित्व

साथ में मातृत्व का भार।

नौकरी ,रसोई गृह तंत

परिजन सेवा का यत्न

सब व्यवस्थित हो कर चले

सीखती रही इसी का मंत्र।

नैनी हेल्पर रखा था

ठीक से घर चलाने को

पैसा को पैसा न समझा

आराम से सब रखने को।

पर जब बडे होकर बच्चों

ने कहा अत्यंत बेरूखी से

तुमने केवल जन्म दिया

बडा तो आया मां ने किया।

तब नाम ,यश,पैसा,मान

कठिन परिश्रम .आय में योगदान

सब फीके पड गये थे

धूमिल हो गये आन बान ।

वात्सल्य के इस प्रतिदान से

मन प्राण दुखित हो गये

कैरियर का जो गौरव था

वो भी धूल में मिल गये।

जिनके लिये देते रहे हम

स्नेह ,सुरक्षा,आनंद के क्षण

वे ऐसा सोचते हैं जान

चूर चूर हो गया ये मन ।

सारा केरियर बराबरी का भूत

सर पर से उतर गया

सोचती हूं अब घर बैठ

एक बात से पानी फिर गया।

घर से बाहर मेहनत की

अपना स्टैन्डर्ड बढाने को

परिजनों के भाव ऐसे हैं

यही मिला था करने को।

विद्या

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