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Eternal Learner

“सीखना”

सीखना पडता है हमें

एटीकेट उठने ,बैठने

खाने ,पीने,सोने का

सभ्य समाज में रहने का।

ऐसा नहीं कि हम असभ्य हैं

नहीं जानते हैं ये सब

बल्कि ये कि हम सुलभ चीजों

का उपयोग करते हैं।

पत्तों में भोजन कर

अंजुरी से ही पी लेते

पेड के नीचे खाट पर

भरपूर नींद सो लेते।

नहीं बनाते ताम झाम

ब्रांडेड कम्पनी के सामान

इक्कठा नहीं करते घर में

कि रक्षा में लगे रहे प्राण ।

वैसे बर्तनों में खाना

बिना आवाज चम्मच चलाना

लाखों के सोफा,चेयर,

वेड का उपयोग करना।

सीखना होगा कि बडे लोग

कैसे बोलते हैं सॉफ्टली

नपी तुली ध्वनि लो साउंड

और कोई न सुने अराउन्ड ।

क्रीच दार कपडे पहन

कैसे बैठना होता है कि

क्रीच कभी नहीं टूटे

कडक पर्सनैलिटी बनी रहे।

सीखना होगा चापलूसी करना

तलवे सहलाना ,जीहुजूरीकरना

अंदर के तूफान को दबा कर

जी हां जी हां करते रहना ।

सभ्य बनकर जीने के लिये

बहुत कुछ जानना होगा

सरलता ,भोलापन त्याग

चालबाजी सीखना होगा ।

विद्या

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