खा पी कर बैठे थे सब
राउन्ड टेबुल कन्फरेंस में
दीन दुनिया की बातें
हो रही थीं फुल सेंस में ।
किसकी बेटी किससे ब्याही
कौन कितने साल का हुआ
ये घटना कब हुई थी
किससे आगे पीछे हुआ?
इसी तरह चल रही थी
दुनिया भर की बातें
सभी लोग वक्ता थे
कोई सुनना नहीं चाहते।
मिटिंग में खलल पहुंचा
दरवाजे की घंटी बजी
एक जन दौड के गया
कौन आया देखूं सही।
खुल गया द्वार बहू आई
अपने सुदूर दफ्तर से
थकी मांदी पसीने भरी
परेशान उठाये फाइलों से ।
मिटिंग खत्म हो गई अब
सब अपने कमरे में गये
मेरे आते ही ये सब
क्षण में कहां चले गये।
रोज का हाल है यही
मेरे सामने नॉरमल न रहते
पीठ पीछे बातें करते
आते ही चुप हो जाते।
कोई बात नहीं थोडा
आराम ही कर लूं
भोजन करूंगी बाद में
पहले कपडे तो बदल लूं।
संध्या कालीन चाय की बेला
सारे लोग एकत्र हुए
नींबू दूध दोनों चाय
इच्छानुसार पीने लगे।
चाय में कुछ कमी हुई
व्यंग वाण सुनने को मिला
घर का काम नहीं आता
बाहर घूमने का सिल सिला।
झाडू ,पोछा ,चौका ,वर्तन
एक दिन भी करना पडे
नानी याद आ जायेगी
दिन काटेगी पडे पडे।
सोचती हूं नौकरी क्यों की
चार घर काम पकड लेती
माता जी खुश हो जातीं
सोचती बहू काम करती ।
ऑफिस का काम काम नहीं है
केवल घूमना फिरना है
कैसे समझाऊंगी उनको
वो काम भी काम ही है।
विद्या
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ख
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