मीरा को भक्ति का जुनून था
राधा को अनुरक्ति का
रूक्मणि,सत्यभामा,जाम्बवती
को पागलपन था आसक्ति का ।
कंस को विध्वंस का जुनून
रावण को बली बनने का
पराकाष्ठा किसी चीज की
सर्वनाश ही कर देता।
सिर चढकर बोलता जुनून
दीखता नहीं कोई और धुन
धन,जन,पद,प्रतिष्ठा ,मान
किसी मार्ग से पाने की धुन।
अतिरेक भरा ये भाव है
सरल शान्ति का अभाव है
धुनी लोग गुनी भी होते
जिद में आकर कुछ भी करते ।
पहाड काट कर मार्ग बनाते
अपने लिये कुछ भी करते
प्यार करते तो टूट कर
नफरत में सीमा लांघ जाते।
हद से ज्यादा जुनन बुरा है
अनेक संकट लिये खडा है
संतुलन यहां भी जरूरी है
नहीं तो पछताना ही है।
दीवानगी है पागलपन है
प्यार घृणा दोनों में होता
धुन चढे जिधर चले जायें
करनी अनुसार फल पायें।
सन्मार्ग की ओर जाना हो
कहां से कहां पहुंच जाते
कुमार्ग की तरफ जाना हो
पतन के गर्त में गिर जाता ।
विचित्र स्थिति है मन की
लोभ ,लाभ,हानि ,साधन की
जुनून जिधर भी लेता जाये
जो भी चाहें वो ही पायें ।
विद्या
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