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Eternal Learner

“कान्हा का जन्मदिन “

कान्हा तो कान्हा है

देवकी का लाला है

प्यारा नंद बाबा का

यशोदा ने पाला है।

भोली भाली आंखें हैं

दूर दृष्टि रखती हैं

लुभावनी दृष्टि से

चित्त चुरा वेता है।

चित्तचोर तो है ही वो

छलिया ,नटवर है

मोहक भंगिमाओं से

सबको लुभाता है ।

कोमल अंग उसके

सुन्दर से सुन्दरतम है

लीला करने में

वो तो अनुपम है ।

प्रतिवर्ष हम उसका

जन्मदिन मनाते हैं

उसकी लीलाओं का

वर्णन सुनाते हैं ।

“भज कृष्ण गोविन्दा

नटवर नागर “ को

आनंद से भरते हैं

प्रेम रस गागर को।

लीला पुरूषोत्तम है

भूलोक का स्वामी है

कण कण में रहता है

वो अंतर्यामी है।

भक्त गण गाते हैं

गा के सुनाते हैं

लीला गा गा कर

भवसिन्धु तरते हैं।

विद्या

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