अब खोज का अगला कदम
ए आई ले कर आये हम
घंटों का काम तुरंत करते
फल मिलता है उत्कृष्टतम ।
नो मिसटेक सटीक काम
शत प्रतिशत होती सक्सेस
किसी समस्या का समाधान
क्षण भर में होती प्रोसेस ।
गतिशीलता,क्षिप्रता असीम
कार्य का त्वरित संपादन
पल भर में जटिल कार्य का
पूर्णता से करे निष्पादन।
सभ्यता का ये वाला कदम
अचंभित करता जाता है
मानों मानव को तिलिस्म
की चाभी देता जाता है।
बिना किसी भेद भाव के
सारा करणीय करता है
बडा ,छोटा ,ऊंच ,नीच छोड
आज्ञा पालन करता है।
एक ही यंत्र में भर दिया
तमाम ज्ञान संसार का
मिल गया भेद मानव को
परम पिता महाकाल का।
पर डर है गुलाम न बने
ए आई के डेटा के
ये बढ कर काम करेगा
आश्रित होंगे मेटा के।
मृत बाघ में प्राण फूंक
थे मूर्ख खतरे में पडे
कहीं ये एआई भी हमें
परजीवी न बना रख दे ।
अगर सौ फीसदी हम सब
इसपर निर्भर हो जायेंगे
सोचना समझना भूल
कुंद मस्तिष्क बन जायेंगे।
बरसों से आ रहे नियम
सद्भाव ,सत्संगति के भाव
विलुप्त होते जायेंगे
अपना पन का होगा अभाव ।
साइबर क्राइम बढेगा
निजता तो खो जायेगी
अकेलापन बढ जायेगा
सहानुभूति समाप्त होगी।
भावना रहित विचार शून्य
सजग मस्तिष्क से संपन्न
अचंभित करता है कर्मों से
लेकर चेतनता भीषण।
मौलिकता बची रहे मानव की
बुद्धि संग विवेक जरूरी है
थोडी दूरी बना कर रखना
हमारी भी मजबूरी है।
ये हम पर है कि इससे
कितने कैसे काम करवायें
सुखद मानवता को बना
आगे ही आगे बढते जायें ।
विद्या
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